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Showing posts from April, 2017

इस्लाम में तलाक़ की हक़ीक़त

यूं तो तलाक़ कोई अच्छी चीज़ नहीं है और सभी लोग इसको ना पसंद करते हैं। इस्लाम में भी यह एक बुरी बात समझी जाती है, लेकिन इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि तलाक़ का हक ही इंसानों से छीन लिया जाए। दरअसल, पति-पत्नी में अगर किसी तरह भी निबाह नहीं हो पा रहा है, तो अपनी ज़िंदगी जहन्नुम बनाने से बेहतर है कि वो अलग होकर अपनी ज़िन्दगी का सफ़र अपनी मर्ज़ी से पूरा करें जो कि इंसान होने के नाते उनका हक है, इसलिए दुनिया भर के कानून में तलाक़ की गुंजाइश मौजूद है, और इसलिए पैगम्बरों के दीन (धर्म) में भी तलाक़ की गुंजाइश हमेशा से रही है। आइए अब जरा नजर डालते हैं पवित्र कुरान में तलाक के असल मायने क्‍या हैं?
दरअसल, दीने इब्राहीम की रिवायात के मुताबिक अरब, जाहिलियत के दौर में भी तलाक़ से अनजान नहीं थे, उनका इतिहास बताता है कि तलाक़ का कानून उनके यहां भी लगभग वही था, जो अब इस्लाम में है, लेकिन कुछ बिदअतें उन्होंने इसमें भी दाखिल कर दी थीं।
किसी जोड़े में तलाक की नौबत आने से पहले हर किसी की यह कोशिश होनी चाहिए कि जो रिश्ते की डोर एक बार बन्ध गई है,उसे मुमकिन हद तक टूटने से बचाया जाए।
जब किसी पति-पत्नी का झगड़ा बढ़ता दिखाई दे, तो…

आयुर्वेदिक तेल के फायदे

आयुर्वेदिक तेल और इनसे होने वाले लाभ:
आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के तेलों का विवरण हैं, हर तेल का अपना महत्त्व हैं, आज आपको ऐसे तेलों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। आइये जाने आयुर्वेद में प्रयुक्त तेल और इनसे होने वाले लाभ।
शंखपुष्पी तेल :-
शंखपुष्पी तेल की मालिश से बच्चों के समस्त रोग दूर हो जाते हैं व यह कांति, मेधा, धृति व पुष्ठि की वृद्धि करता है। ज्वर व दुर्बलता को मिटाता है। बच्चों के सूखा रोग में इस तेल के उपयोग से विशेष लाभ होता है।
महामाष तेल :-
पक्षाघात, अर्दित, अपतन्त्रक, अपबाहुक, विश्वाची, खंज, पंगुता, सिर का जकड़ना, गर्दन का जकड़ना, वातिक अधिमांद्य, शुक्रक्षय, कर्णनाद आदि में लाभ प्रदान करता है।
काशीसादि तेल :
व्रण शोधक तथा रोपण है। इसके लगाने से बवासीर के मस्से नष्ट हो जाते हैं। नाड़ी व्रण एवं दूषित व्रणों के उपचार हेतु लाभकारी। प्रयोग विधि :- बवासीर में दिन में तीन चार बार गुदा में लगाना अथवा रूई भिगोकर रखना।
लक्ष्मीविलास तेल :-
लक्ष्मीविलास तेल की मालिश करने से मस्तिष्क रोग, स्नायु रोग, स्नायविक दुर्बलता, प्रमेह, वात-व्याधि, मूर्छा, उन्माद, अपस्मार, ग्रहणी, पांडु रोग, शोथ, नं…

शीघ्र पतन का नुस्खा

॥शीघ्र पतन नाशक चूर्ण ॥
1अशवगंधा 20 ग्राम 
2 सफेद मुसली " "
3 काली मुसली 
4 बिदारी कंद 
5 वराही कंद 
6 कौच बीज शुद्ध
7 ताल मखाना 
8 सेमर मुसली 
9 जीवंती 
10 वला बीज 
11 वन सिघाडा 
12 सतावर 
13 रूमी मस्तंगी 
14 सालम पंजा
15 वहमन सफेद 
16 जायफल 10ग्राम 
17 अकरकरा 
 18 सौठ 
19 लौंग 
20 कैशर 2 ग्राम 
21 स्वर्ण वंग 2ग्राम
22 त्रिवंग 2 ग्राम 
23 वंग 2 ग्राम 
24 शुद्ध शिलाजीत 5 ग्राम
25 शुद्ध भाँग 10 ग्राम 
काष्ठ औषधि का चूर्ण कर ले फिर भस्म मिला ले मिश्री पीसकर जितना औषधि वजन है उतनी मिश्री मिला कर रखे ? राजू पुजारी 2 ग्राम से लेकर 5 ग्राम तक दवा गाय के दूध से ले शाम को सोने से 1 घंटा पहले किसी भी तरीके से कमजोरी हो दूर होती है शीघ्र पतन की रामवाण दवा है

सर्दी जुकाम का देशी इलाज

सर्दी, जुकाम, छींक, खांसी, बुखार और अस्थमा सभी के लिए 1 औषधि।
सर्दी, जुकाम, छींक, खांसी, बुखार और! अस्थमा सभी के लिए 1 औषधि।
सीतोपलादी चूर्ण ।
सीतोपलादी चूर्ण आयुर्वेद का बहुत प्रसिद्ध औषधि है। जब सर्दी, खांसी, बुखार 1 साथ ये सब हो जायें । तो उसके लिए सीतोपलादी चूर्ण प्रयोग करें। एक ऐसा अनुभव जिसने अनेक डॉक्टरों की नींद हराम कर दी. ज़रूर जानिये.
औषधि
सीतोपलादी चूर्ण 1 चुटकी (1/4 चम्‍मच) शहद में मिलाकर प्रात: और सायंकाल खाली पेट चटायें। इससे छोटे बच्‍चों के सर्दी, जुकाम, छींक, खांसी, बुखार और अस्थमा जैसे रोग ठीक होते हैं। बडे लोगों के लिए 1/2 चम्‍मच चूर्ण का प्रयोग करें।
सितोपलादि चूर्ण बनाने की विधि
नीचे बताई गयी चीजे किसी भी किराना या पंसारी की दुकान पे आराम से मिल जायेगी।
1- मिश्री-16 भाग 160 g.m
2-वंशलोचन – 8 भाग 80 g.m
3-पिप्पली-4 भाग 40 g.m
4- इलाइची- 2 भाग 20 g.m
5-दालचीनी- 1 भाग 10 g.m इन सब को बरीक पीस ले।
और बना गया आप का सितोपलादि चूर्ण
ये मधु या घी के साथ लिया जाता है
2 से 4 ग्राम की मात्रा में ले।
वैसे ये किसी भी मेडीकल स्टोर पे उप्लब्द है। ये झंडू, बैद्यनाथ, डाबर या रामदेव की दूकान से भी…

माइग्रेन का इलाज

माइग्रेन से बचने के लिए घरेलू उपचार*
1) अगर माइग्रेन हो तो सबसे पहले हल्के हाथों से मालिश करनी चाहिए। हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम किसी दवा से ज्यादा असर करता है। सरदर्द होने पर कंधों और गर्दन की भी मालिश करनी चाहिए। इससे दर्द से राहत मिलती है।
2) एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश कीजिए। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है।
3) माइग्रेन में बर्फ के टुकडों का भी प्रयोग किया जा सकता है।
4) सिर दर्द होने पर अपनी सांस की गति को थोड़ा धीमा कर दीजिए, लंबी सांसे लेने की कोशिश बिलकुल मत कीजिए। आराम से सांस लेने से आपको दर्द के साथ होने वाली बेचैनी से भी राहत मिलेगी।
5) माइग्रेन में दर्द होने पर कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश कुछ देर तक मालिश कीजिए।
6) बटर में मिश्री को मिलाकर खाने से माइग्रेन में राहत मिलती है।
7) नींबू के छिलके को पीसकर, इसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन में होने वाले सिरदर्द से राहत मिलती है और माइग्रेन ठीक होता है।
8) माइग्रेन में अरोमा थेरेपी सिरदर्द से राहत दिला सकती है। अरोमा…

अमरबेल के फायदे

औषधीय गुणों से भरपूर अमरबेल आपने भी अमरबेल को किसी न किसी बड़े पेड़ पर फैले हुए जरूर देखा होगा। हालांकि लोग इसे खरपतवार समझकर निकाल फेंकते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही इसके औषध्ाीय गुणों से वाकिफ होंगे। अमरबेल फालतू नहीं बड़े काम की होती है। आइए, हम आज आपको इसके औषध्ाीय गुणों से परिचित कराते हैं- अमरबेल का परिचय:- अमरबेल एक पराश्रयी (दूसरों पर निर्भर) लता है, जिसे प्रकृति का चमत्कार ही कहा जा सकता है। बिना जड़ की यह बेल जिस वृक्ष पर फैलती है, अपना आहार उसके रस चूसने वाले सूत्र के माध्यम से प्राप्त कर लेती है। अमरबेल का रंग पीला और पत्ते बहुत ही बारीक तथा नहीं के बराबर होते हैं। अमरबेल पर सर्द ऋतु में कर्णफूल की तरह गुच्छों में सफेद फूल लगते हैं। इसके बीज राई के समान हल्के पीले रंग के होते हैं। अमरबेल बसंत ऋतु (जनवरी-फरवरी) और ग्रीष्म ऋतु (मई-जून) में बहुत बढ़ती है और शीतकाल में सूख जाती है। जिस पेड़ का यह सहारा लेती है, उसे सुखाने में भी यह कोई कसर बाकी नहीं छोड़ती। अमरबेल गर्म एवं रुखी प्रकृति की होती है। इस लता के सभी भागों का उपयोग औषध्ाि के रूप में किया जाता है। अमरबेल का प्रयोग खुज…

त्रिवंग भस्म

त्रिवंग भस्म त्रिवंग भस्म आयुर्वेद की तीन धातुओं से बनी एक औषधि है। इसे तीन धातुओं सीसा, टिन और जिंक की भस्म से बनाया जाता है। त्रिवंग भस्म को मधुमेह diabetes, प्रमेह, मूत्रपिंड, मूत्रवाहिनी के रोग, वीर्य का स्वतः ही स्राव हो जाना, गर्भ की कमजोरी, शारीरिक कमजोरी आदि के इलाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका सेवन शरीर की कोशिकाओं का पोषण करता है और आवश्यक खनिज और पोषक तत्व प्रदान करता है। इसे बहुत कम मात्रा में उपयोग किया जाता है। सामान्य थकान और कमजोरी को दूर करने के लिए यह एक अच्छी औषधि है। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक tonic/Rasayana है।
त्रिवंग भस्म के घटक Ingredients of Trivang Bhasma
Trivang Bhasma contains three bhasma of following metals:
वंग (Tin) टिन
नाग (Lead) लेड या सीसा
यशद (Zinc) जस्ता या जिंक
त्रिवंग भस्म बनाने की विधि Method of preparation
बराबर अनुपात में शुद्ध नाग, शुद्ध वंग और शुद्ध जस्ते को धीमी आंच पर एक लोहे के बर्तन में पकाया जाता है। भांग Cannabis और अफीम Opium पोस्ते का पाउडर कम मात्रा में लगातार मिश्रण में डाल कर एक लोहे की कलछी से चलाया जाता है। ऐसा तब तक किया जाता …

पीरियड्स रुक जाने का इलाज

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*मासिक धर्म के रुक जाना का घरेलु उपचार *
मासिक धर्म स्त्री में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है| यदि मासिक धर्म में अनियमितता होती है तो स्त्री के शरीर में अन्य विकार उत्पन्न हो जाते हैं| इसका कारण शरीर के भीतर किसी रोग का होना भी हो सकता है| इसके सुचारु रूप से न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित रह जाती है|
नुस्खे 👌
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🙇 3 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से माहवारी ठीक हो जाती है|
🙇 दूब का रस एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय पीने से रुकी माहवारी खुल जाती है|
🙇 कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर कुछ दिनों तक खाने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
🙇 ग्वारपाठे का रस दो चम्मच की मात्रा में खाली पेट लगभग दो सप्ताह तक सेवन करें|
🙇 10 ग्राम तिल, 2, ग्राम कालीमिर्च, दो नग छोटी पीपल तथा जरा-सी शक्कर-सबका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता हैl
🙇 3 ग्राम तुलसी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें|
🙇 50 ग्राम सोंठ, 30 ग्राम गुड़, 5 ग्राम बायबिड़ंग तथा 5 ग्राम जौ - सबको मोटा-मोटा कूटकर दो कप पानी में औटाएं| जब पानी आधा कप रह जाए तो काढ़े का सेवन करें| रुका…

गर्मी में चीकू खाने के फायदे

*गर्मी में खाना चाहिए चीकू*
1. आंखों के लिए ये है लाभदायक- चीकू में विटामिनए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, इसलिए इसकेसेवन से आंखें उम्र भर स्वस्थ रहती हैं और आंखों कीसमस्याएं भी दूर होती है।
2. रखता है ऊर्जा से भरपूर- चीकू में ग्लूकोज अच्छीमात्रा में पाया जाता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जाप्रदान करता है। इसलिए गर्मी में रोज चीकू खानाचाहिए। इससे शरीर ऊर्जा से भरपूर रहता है।
3. बीमारियों से बचाता हैचीकू में टैनिन पाया जाता है। इसलिए यह कब्ज,दस्त, और एनिमिया जैसी बीमारियों से शरीर काबचाव करता है। इससे आंतों की शक्ति बढ़ती है। साथही, यह दिल आैर गुर्दे से जुड़ी बीमारी में भीरामबाण हैं।
4. झुर्रियों को कम करेंचीकू में एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जातेहैं। यह फ्री रेडिकल्स को समाप्त कर देता है, औरझुर्रियों को भी कम कर देता है।
5. हड्डियों के लिए है फायदेमंदचीकू में कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन पायाजाता है। इन तत्वों की अच्छी मात्रा होने केकारण यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है औरउन्हें बीमारियों से बचाता है।
6. इसे खाने से कब्ज दूर हो जाती हैचीकू में फाइबर बहुत अधिक मात्रा में पाया जाताहै।…

छाछ पीने के फायदे

छाछ
छाछ अपने गरम गुणों, कसैली, मधुर और पचने में हलकी होने के कारण कफ़नाशक और वातनाशक होती है, पचने के बाद इसका विपाक मधुर होने से पित्तक्रोप नही करती ।
जो भोरहि माठा पियत है,
जीरा नमक मिलाय !
बल बुद्धि तीसे बढत है,
सबै रोग जरि जाय !!
मट्ठा को पीने से सिर के बाल असमय में सफेद नहीं होते हैं। भोजन के अन्त में छाछ, रात के मध्य दूध और रात के अन्त में पानी पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।छाछ या मट्ठा शरीर में उपस्थित विजातीय तत्वों को बाहर निकालकर नया जीवन प्रदान करता है।
यह शरीर में प्रतिरोधात्मक (रोगों से लड़ने की शक्ति) शक्ति पैदा करता है। मट्ठा में घी नहीं होना चाहिए। गाय के दूध से बनी मट्ठा सर्वोत्तम होती है। मट्ठा का सेवन करने से जो रोग नष्ट होते हैं। वे जीवन में फिर दुबारा कभी नहीं होते हैं।
छाछ खट्टी नहीं होनी चाहिए। पेट के रोगों में छाछ को दिन में कई बार पीना चाहिए। गर्मी में मट्ठा पीने से शरीर तरोताजा रहता है। रोजाना नाश्ते और भोजन के बाद मट्ठा पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। मट्ठा को पीने से सिर के बाल असमय में सफेद नहीं होते हैं।
भोजन के अन्त में मट्ठा, रात के मध्य दूध और रात के अन्त में…

Vivo V5 S Hindi Review

कल vivo ने अपना नया फोन Vivo V5-S लॉन्च किया,2 मिनट की ये पोस्ट पढ़िए और आपको पता लगेगा कैसे ये लोग आपको बेवकूफ बनाते व लोग अपनी मेहनत की कमाई बर्बाद करते। सीधे पॉइंट पे आते है। फोन के प्रोसेसर बनाने वाली 4-5 कंपनी में बेस्ट प्रोसेसर Qualcomn, Samsung exynos का होता है और सबसे घटिया Spectrum और Mediatek का होता है।और vivo ने फ़ोन में यही प्रोसेसर यूज किया है..सबसे घटिया क्वालिटी का..इसलिए तो वो विज्ञापन में प्रोसेसर का नाम तक नहीं बताते। फ़ोन की दूजी सबसे इम्पोर्टेन्ट चीज़..उसका डिस्प्ले।सबसे अच्छी क्वालिटी का डिस्प्ले है Super Amoled जो सेमसंग यूज करता और Retina Display जो एप्पल यूज करता पर vivo सबसे साधारण क्वालिटी का IPS डिस्प्ले यूज करता जिसमे वाइब्रेंट कलर नहीं होते.vivo के इस 19 हज़ार के फोन में आपको 720p का डिस्प्ले मिलेगा जबकि 10 हज़ार के redmi note 4 में फुल HD 1080p का डिस्प्ले है।यानी इसका डिस्प्ले अव्वल क्लास का घटिया डिस्प्ले है। तीसरी सबसे जरुरी चीज़ बैटरी व रैम मैनेजमेंट..मीडियाटेक का प्रोसेसर है तो सिंपल सी बात है रैम मैनेजमेंट चाह कर भी Sufficient नहीं हो सकता वही बैटरी कैप…

इस्लाम और तलाक़

तलाक़ का फ़ायदा इस्लाम में तलाक़ के क़ानून की क्या हिकमत और मस्लिहत है ? ब'आज भाई कहते हैं के तलाक़ का क़ानून ख़त्म कर दिया जाये तो क्या हरज है? उन को क्या जवाब दिया जाये ? तलाक़ की हिकमत..! निकाह एक मुआहदाह (एग्रीमेंट) है, शोहर की तरफ से इस बात का के वह बीवी का महर, उस की तमाम ज़रूरियात का खर्चा और उस के साथ अच्छा सुलूक करेगा, और औरत की तरफ से इस बात का के वह बदकारी नहीं करेगी, शोहर के हुक़ूक़ अदा करेगी..! अगर दोनों में से कोई भी अपना एग्रीमेंट पूरी ना करे तो दुन्या के दूसरे मुआमलों की तरह ये मुआमलाह भी फ़स्ख़ देने के क़ाबिल हो जाता है, इसे तोड़ने के लिए सुलह की सब कोशिश के बाद मर्द को तलाक़ देने का इख़्तियार और औरत को इस्लामी क़ाज़ी के पास जाकर निकाह तुड़वाने का इख़्तियार दिया है..! औरत शोहर के या शोहर बीवी के हुक़ूक़ अदा ना करे, मसलन दोनों में से कोई गंदे काम, बदकारी करने लगे तो उस की मिसाल बदन के उस हिस्से और दांत की तरह है, जो सड़ गया हो और उस की वजह से पुरे जिस्म को तकलीफ हो रही हो, तो उस हिस्से को काट देना कोई भी बुरा नहीं समझता, बल्कि ज़रूरी समझता है, इसी तरह ना फरमान (गन्दा काम करनेवाली ) औरत को…

खूबसूरत औरत व जवान लड़का

एक खूबसूरत औरत एक नौजवान लड़का वो औरत रोज़ उस नौजवान को देखती लेकिन वह बिना उसकी तरफ देखे सर झुकाकर उसकी गली से गुज़र जाता देखने में वह किसी मदरसे का तालिब इल्म लगता था, लेकिन इतना खूबसूरत था कि वह देखते ही उसे अपना दिल दे बैठी, और अब चाहती थी कि वह किसी तरह उस पर नज़र डाले, लेकिन वह अपनी मस्ती में मगन सर झुकाए कुछ पढ़ता हुआ रोज़ एक वक्त पर वहाँ से गुज़रता और कभी आंख उठाकर भी न देखता उस औरत को, अब ज़िद सी हो गई थी वह हैरान थी कि कोई ऐसा शख्स भी हो सकता है? जो उसकी तरफ न देखे, और उसे ऐसा सोचने का हक भी था वह अपने इलाके की सबसे अमीर और खूबसूरत औरत थी, खूबसूरत इतनी कि जब वो बाहर निकलती तो लोग उसे देखने पर मजबूर हो जाते हैं, उसे हैरत थीं कि जिसकी खूबसूरती को देखने के लिए लोग तरसते हैं, वह खुद किसी को पसंद करे और वो मायल न हो, उसकी ओर देखना गवारा न करे, अपनी अना की हार और खूबसूरती की तौहीन पर वो पागल हो गई, और कोई ऐसा मंसूबा सोचने लगी जिससे वो उस शख्स को हासिल कर सके, और उसका घमंड तोड़ सके..! आखिरकार शैतान ने उसे एक ऐसा तरीका सुझा दिया जिसमें फंसकर वो नौजवान उस की बात माने बगैर रह ही नहीं सकता…

जिन्नात की हकीकत

जिन्नात के बारे में हैरत अंगेज़ जानकारी..! जिन भी इंसान की तरह ही अल्लाह की एक मखलूख है, जो आग से पैदा की गई है, बनी आदम नू इंसानी की तरह यानी रूह और जिस्म वाला) वाली है, उनमें तवालद और तनासुल भी होता है, यानी इंसानों की तरह, उनकी भी नस्ल बढती़ और फल फूलती है, खाते-पीते, जीते मरते हैं, लेकिन उनकी उम्र बहुत लंबी होती हैं, उनकी उम्र हजारों साल होती हैं..! जिन्नो में मुसलमान भी हैं काफिर भी, लेकिन उनमे कुफ़्फ़ार, इंसान की बनिसबत बहुत ज़्यादा हैं, उनके मुसलमान नेक भी हैं, और फासिक भी, लेकिन उनमें फ़ासिकों, बदकारों की तादाद इंसान के बनिसबत ज़्यादा है, शरीद जिन्नो को शैतान कहते हैं, इन सबका सरगना इब्लीस है, जो कि पहले जिन "मारिज" के पोते का बेटा था इब्लीस ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को गुरूर में आकर सजदा करने से इनकार कर दिया था। और हुक्म खुदा की नाफर्मानी की थी, जिसकी वजह से रानदा बारगाह इलाही हुआ, और हमेशा के लिए मर्दूद किया गया, क़यामत तक के लिए यह राहत दी गई, और उसे मोहलत देना उसके इकराम के लिए नहीं, बल्कि उसकी शकावत और अज़ाब ज़ियादती के लिए है..! इब्लीस की तरह उसकी ज़ुर्रियत भी मर्द…

असहाबे कहफ़

असहाबे कहफ़ असहाबे कहफ़ 7 मर्द मोमिन हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की उम्मत के लोग थे,उनके नाम में बहुत इख़्तिलाफ़ है, लेकिन जो मशहूर है वो दर्ज करता हूं..!!! 1: मकसलमीना 2: यमलीख़ा 3: मरतूनस 4: बीनूनस 5: सारीनूनस 6: ज़ूनूनस 7: कश्फीतनूनस उनके साथ एक कुत्ता भी था जिसका नाम क़ितमीर था, हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के बाद उनकी उम्मत की हालत बदतर हो गयी, वो लोग बुतपरस्ती में मुब्तेला हो गए, उस वक़्त का बादशाह दक़्यानूस, जो कि खुद बुत परस्त था और लोगों को बुत परस्ती करने पर मजबूर करता और न करने पर सज़ा देता, असहाबे कहफ़ शहरे रोम के सरदार और ईमान वाले लोग थे, एक मर्तबा अपनी क़ौम के साथ ईद मनाने गए तो देखा कि लोग बुत परस्ती में लगे हुए हैं, इनका वहां जी न लगा और एक एक करके सब वहां से निकल गए, सातों एक ही पेड़ के नीचे जमा हो गए, सब एक दूसरे से अनजान थे और यही सोच रहे थे कि अगर मेरा हाल इन्हें पता चला तो ये दुश्मन हो जाएंगे..! आखिर उनमें से एक बोला कि कोई बात तो है जो हमें यहां शहर से दूर ले आयी है, तब सबने एक ज़बान होकर ये कहा कि हम बुत परस्ती से आजिज़ आकर यहां आ गए हैं, फिर क्या था उनके दिल में मुहब्बत की लहर दौड़ गयी …

उमर बिन अब्दुल अज़ीज़

उमर बिन अब्दुल अज़ीज़..! उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्ला अलैहि जिन्हें उम्र शानी भी कहा जाता है, उनके अद्लो इंसाफ़ की मिशालें आज तक बयान किया जाता है.! सल्तनत का आलम ये है कि तीन बर्रे आज़म पर हुकूमत थी और कोई ज़कात लेने वाला न था, उनकी हुकूमत दमिश्क से दीपालपुर कश्मीर तक दमिश्क से काशगर चीन तक, दमिश्क से सेनेगल चाड तक और दमिश्क से दक्षिण फ्रांस तक लाखों वर्ग मील थी, और यह आलम था कि लाखों वर्ग मील में कोई ज़कात लेने वाला न था। लेकिन अपना घर खाली था, ईद का मौका है बारह बच्चे हैं और पहनने को कपड़े नहीं हैं, बच्चे माँ के पास आते हैं कि हमें अब्बा से कहकर कपड़े तो मंगवा दें, माँ यानी फ़ातिमा बिन्ते अब्दुल मलिक सात निसबतों से शह ज़ादी हैं, उनके दादा खलीफा बने उनके वालिद अब्दुल मलिक खलीफा बने, उनके चार भाई खलीफा बने, और उनके शौहर उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्ला अलैहि खलीफा बने..! और उनके वालिद अब्दुल मलिक अपनी बेटी को हीरे में तौलते थे, अब आलम यह है कि बच्चों के पास ईद पर पहनने के कपड़े नहीं हैं, शाम को उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्ला अलैहि घर आए तो बेगम ने कहा "ईद आ रही है बच्चे कपड़े मांग रहे है…

इस्लाम और जबरन धर्म परिवर्तन

“फिर जब हराम के महीने बीत जाएं तो मुश्रिको को जहाँ पाओ मारो, उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो, और घात लगाने वाली जगह पर उनकी घात लगाकर बैठो, फिर यदि वे तौबा कर लें, नमाज कायम करें, और जकात दें तो उनका रास्ता छोड़ दो ” (Al Qur’an 9:5)

हमारे एक भाई का सूरह तौबा की आयत नम्बर पांच के बारे मे कहना है कि इससे साबित हो रहा है कि अगर मुसरिक ईमान ले आए तो जान बक्श दो यदि नहीं तो मार दो

सबसे पहले मैं भाई की मुख्य शंका दूर करना चाहूंगा कि कुरान 9:5 का ये आदेश मुस्लिमों को इसलिए नहीं था कि वे दूसरे समुदायों पर हमले कर के उन्हें पराजित कर के जबरन उनका इस्लाम मे धर्मान्तरण कर के इस्लाम का प्रसार करें, बल्कि 9:5 का आदेश, पहले भी बहुत बार बता चुका हूँ इसलिए था, ताकि मुस्लिम अपने ऊपर हमले करने वाले गैर मुस्लिमों के हाथों इस्लाम का समूल नाश होने से बचा सकें, दूसरे शब्दों मे कहूँ तो ये और ऐसे अन्य युद्ध के आदेश इस्लाम के प्रसार के लिए नहीं बल्कि काफिरों के हाथो से मुस्लिमों की प्राणरक्षा हो सके इसलिए थे ॥

फिर भी यदि एक बार को मान लिया जाए कि कुरान के ये आदेश इस्लाम के क्रूरतापूर्वक प्रसार के लिए ही दिए गए थे तो…

इस्लाम और गैर मुस्लिम से दोस्ती

बहुत से लोग सूरह मायदा की यहूदियों और ईसाई लोगों से मित्रता न करने सम्बन्धी आयतें और बहुदेववादी लोगों से मित्रता न करने के आदेश सम्बन्धी आयत को दिखाकर पूछते हैं कि पवित्र कुरान मे मुस्लिमों को गैर मुस्लिमों से दोस्ती न करने का आदेश देकर शत्रुता का पाठ पढ़ाया गया है ......लेकिन ऐसा नहीं है

सौचिए अगर यहूद ओ नसारा से मुस्लिमों की सिर्फ दुश्मनी है तो इस्लाम मे यहूद ओ नसारा औरतों से शादी हलाल और शादी के बाद भी उन औरतों को अपने धर्म का पालन करते रहने की, और उन्हें अपने माएके वालों से मधुर सम्बन्ध बनाए रखने की आजादी क्यों है .... क्या दुश्मनों से शादी कर के कहीं उनसे खानदानी रिश्ते भी बनाए जाते हैं ???

यहूदियों और ईसाईयो से मित्रता के निषेध की आयत तो देख ली आप ने पर मैं आपको बताऊं कि मुस्लिम कुरान मे केवल ये एक दो आयतें पढ़कर ही फैसला नही करने लगते, बल्कि मुस्लिम सम्पूर्ण कुरान पढ़कर, व हर आयत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि देखकर ही कुरान पाक की किसी शिक्षा को अमल मे लाते हैं .... और सम्पूर्ण कुरान पाक समस्त मानवजाति के लिए दयालुता है , ये बात पवित्र कुरान से परिचित हर व्यक्ति जानता है ...
सूरह मायदा की…

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