जिन्नात की हकीकत

जिन्नात के बारे में हैरत अंगेज़ जानकारी..!
जिन भी इंसान की तरह ही अल्लाह की एक मखलूख है, जो आग से पैदा की गई है, बनी आदम नू इंसानी की तरह यानी रूह और जिस्म वाला) वाली है, उनमें तवालद और तनासुल भी होता है, यानी इंसानों की तरह, उनकी भी नस्ल बढती़ और फल फूलती है, खाते-पीते, जीते मरते हैं, लेकिन उनकी उम्र बहुत लंबी होती हैं, उनकी उम्र हजारों साल होती हैं..!
जिन्नो में मुसलमान भी हैं काफिर भी, लेकिन उनमे कुफ़्फ़ार, इंसान की बनिसबत बहुत ज़्यादा हैं, उनके मुसलमान नेक भी हैं, और फासिक भी, लेकिन उनमें फ़ासिकों, बदकारों की तादाद इंसान के बनिसबत ज़्यादा है, शरीद जिन्नो को शैतान कहते हैं, इन सबका सरगना इब्लीस है, जो कि पहले जिन "मारिज" के पोते का बेटा था इब्लीस ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को गुरूर में आकर सजदा करने से इनकार कर दिया था। और हुक्म खुदा की नाफर्मानी की थी, जिसकी वजह से रानदा बारगाह इलाही हुआ, और हमेशा के लिए मर्दूद किया गया, क़यामत तक के लिए यह राहत दी गई, और उसे मोहलत देना उसके इकराम के लिए नहीं, बल्कि उसकी शकावत और अज़ाब ज़ियादती के लिए है..!
इब्लीस की तरह उसकी ज़ुर्रियत भी मर्दूद है, यह सब शैतान हैं, औरों को बहकाना उनका काम है, तरह तरह की तरकीबों से नेक रास्ते से रोकते और बुरे कामों की तरफ तरगीब दिलाते हैं, अल्लाह के नेक बंदे उनके मकरूह अगवाह मे नहीं आते, बल्कि लाहौल भेजकर नेक कामों में लगे रहते हैं, लेकिन जो उनके बहकावे में आ जाते हैं वह आखिरकार गुमराह हो जाते हैं, अल्लाह अपनी पनाह मे रखे और उनके मकरूह अगवाह से बचाए..!
फरिस्तों की तरह जिन्न को भी कुछ को ताकत दी गई है कि जो चाहे बन जाएं, हदीसों से साबित होता है कि उनमें किसी किसी के पर भी होते हैं और वे हवा में उड़ते फिरते हैं, और कुछ सांपों और कुत्तों की शक्ल गश्त लगाते फिरते हैं और कुछ इंसानों की तरह रहते हैं, लेकिन अक्सर उनके मकान जंगल सुनसान मकान और पहाड़ हैं।
इस्लाम से पहले भी अरबों में जिन्न के ज़िक्र मौजूद थे, उस ज़माने में सफर करते वक्त जब रात आ जाती थी तो मुसाफिर अपने इलाके के जिन्न के सरदार के सुपुर्द कर के सो जाते थे, कहा जाता है कि इंसान बनाने से पहले दुनिया में जिन बसे थे, जिनकी तखलीख आग से हुई थी, और उन्होंने दुनिया में बुराईयों बरपा कर रखा था, कुरान में हज़रत सुलेमान के मुताल्लिक बयान किया गया है कि उनकी हुकूमत जिन्न पर भी थी, हज़रत सुलेमान ने जो इबादत गाह ''हैकल" बनवाई थीं, वह जिन्न ने ही बनाई थी..!
सही हदीस में है कि हर इंसान के साथ एक हमज़ाद शैतान जिन होता है, हमज़ाद जिन एक तरह का शैतान है, वह शैतान हर वक्त आदमी के साथ रहता है वह पूरा काफिर अबदी है, सिवाय इसके कि हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में हाज़िर था, वो इसकी बरकत से मुसलमान हो गया, सही मुस्लिम में हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से है, पैगंबर सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम फरमाते हैं: लोगो! आप कोई शख्स नहीं है कि जिसके साथ हमज़ाद जिन और हमज़ाद फरिस्ता न हो, लोगों ने अर्ज़ की ऐ अल्लाह के रसूल! क्या आप के साथ भी है इरशाद कि हाँ मेरे साथ भी है, लेकिन अल्लाह ने मेरी मदद फ़रमाई कि वह (हमज़ाद शैतान) मुसलमान हो गया तो वह मुझे भलाई कुछ नहीं कहता..!
(सही मुस्लिम प* 1512 हदीस 2814)
इस हदीस की दरका में मरकाۃ और अश अतुल ममात है, कि जब कोई इंसान का बच्चा पैदा होता है तो उस के साथ ही इब्लीस का एक शैतान पैदा होता है, जिसे फारसी में हमज़ाद अरबी में जुनूनी कहते हैं, ज़ाहिर यह है कि शैतान के हर हर आन सैकड़ों बच्चे पैदा होते रहते हैं, मुताबिक औलाद इंसान जैसे मछली, नागिन सांप एक साथ हज़ारों अंडे देती हे, तागवती जराशिंम हर आन बच्चे देते रहते हैं..!
मुस्लिम शरीफ़ में है कि अब्दुल्ला बिन मसूद रज़िअल्लाह बयान फ़रमाते हैं, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया। मेरे पास जिन्न का दाई आया तो मै उसके साथ गया और उन पर कुरान पढ़ा कहा कि वे हमें लेकर गया और अपने आसार और अपनी आग के आसार दिखाई, और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से (खाने) के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि हर वो हड्डी जिस पर अल्लाह का नाम लिया गया हो वह तुम्हारे हाथ आएगी तो वह मांस होगी और हर मेग्नी तुम्हारे जानवरों का चारा है, तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया इन दोनों से स्वयं न करो क्योंकि यह तुम्हारे भाइयों का खाना है..!
जो पृथ्वी पर हम जीवन गुज़ार रहे हैं उसी पर वह भी रहते हैं, और उनकी आवास अक्सर खराब स्थानों और गंदगी वाली जगह होती हैं, जैसे शौचालय 'गंदगी फेंकने और मल की जगह आदि तो इसीलिए अल्लाह के नबी ने उन जगाहों में दाखिल होते वक्त असबाब अपनाने के लिए कहा है, यानी दुआएं और अज़कार, कब्रिस्तान और सुनसान जगाहों पर भी उनका डेरा होता है, इसी तरह घरों की छतों पर भी ये मख्लूक रहती है। इसीलिए शाम के वक्त जब सूरज ग़ुरूब होते वक्त नबी अकरम (स) ने छोटे बच्चों को छतों पर छोड़ने से मना किया..!!!

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