एक जबरन बने किन्नर की कहानी

"मेरे पापा क्लर्क थे हम चार भाई बहन थे ....दो बहन और दो भाई ।मैं सबसे छोटा था और मेरे मां के शब्दों में मैं बहुत खूबसूरत था ....अपनी बहनों से भी ज्यादा खूबसूरत ..मेरी मां अक्सर कहती थी.....तू अकेले न जाया कर ....तू इतना सुंदर है कहीं कोई तुझे उठा न ले..... 
मैं पढ़ाई में कमजोर था ऊपर से मां के अत्यधिक दुलार में और बहनों के लाड प्यार ने मुझे और निकम्मा बना दिया.... पाँचवीं कक्षा में मैं फेल हो गया तो पिताजी ने मुझे बहुत मारा उनकी मार की वजह से मैं बहुत नाराज था .....मैंने सोचा , सबक सिखाऊंगा पापा को और 2 दिन के लिए किसी दोस्त के घर जा कर रहूंगा ....परेशान होंगे तब पता चलेगा....... और मैं शाम को घर से बिना बताए निकल गया रात 10:00 बजे जब भूख लगी तो किसी के दिए हुए समोसे खाने के बाद मुझे जब होश आया तो कमरे में अँधेरा था...ज़ीरो वाट का बल्ब किनारे जल रहा था. ..मेरे दोनों पैरों के बीच लिंग की जगह भयंकर दर्द और जलन हो रही थी...उठने की कोशिश की तो दर्द की तेज़ लहर लिंग के स्थान पर जा कर ठहर गई...मैं आह !! करके वापस गिर पड़ा और रो पड़ा...मैं ताकत लगा कर रो भी नहीं पा रहा था...हर बार हर साँस के साथ दर्द बढ़ता जा रहा था....मैं हाथ भी नहीं लगा पा रहा था....जाने क्या हुआ था मेरे साथ!!! मैं नंगा था कमर से नीचे...और कुछ बँधा था पट्टी जैसा मेरे लिंग वाले स्थान पर....बहुत देर बाद कोई अंदर आया....हाथ में पानी था उसके..."ले पी ले"...उसने कहा... "मैं कहाँ हूँ...मेरे साथ क्या किया है ??" मैंने रोते और गिड़गिड़ाते हुए पूछा था......जवाब मिला..."डर मत....बस एक हफ्ते में सब ठीक हो जाएगा....तू अब हममें से एक है...हमारे परिवार का सबसे छोटा सदस्य....पानी पी"...
मैंने पानी पिया...पिया क्या डर के मारे किसी तरह गटक लिया...फिर उसने एक इंजेक्शन निकाला...और बोला...इसे लगाने से दर्द कम हो जाएगा....और मेरी हाँ ना सुने बिना ही भोंक दिया मेरे पुट्ठे में....पर वो कुटिलता के साथ मुस्कुराया...और दरवाजा को बाहर से सिटकनी लगा कर चला गया....
मैं डर के मारे अब काँप रहा था....मेरा लिंग काट दिया गया था शायद और मुझे हिजड़ा बना कर उन लोगों ने अपने परिवार में शामिल कर लिया था मुझे मेरे परिवार से हमेशा हमेशा के लिए अलग करके.....मेरी आँखें बंद होने लगी थीं....इंजेक्शन दर्द का नहीं नींद या बेहोशी का था...मैं अपनी माँ को याद कर सिसक पड़ा...माँ...अब शायद मैं तुम्हें कभी न देख पाऊँ...कभी तुम्हारे आँचल से नहा कर आने पर अपने गीले बाल न सुखा पाऊँ....अब दोनों दीदी कभी मेरी कलाई में राखी न बाँध पाएँगी....पापा की डाट से बचाने के लिए अब तुम्हें कभी झूठ नहीं बोलना पड़ेगा....अब माँ कभी नहीं कह पाएगी...मेरा सुंदर बच्चा...आँसुओं की लडीं आँखों के बाहरी कोर से होते हुए कान के पीछे बालों को भिगाती रही और मेैं धीरे धीरे चेतना शून्य होता गया....
आज मैं ताली बजा -बजा कर...नाच कर घर -घर जा कर ज़बरदस्ती नेग माँगता हूँ....न देने की सूरत में नंगा होने की धमकी देता हूँ....हाथ पैर में वैक्स करता हूँ...और हार्मोंस के इंजेक्शन लेने के बावजूद अविकसित वक्ष को पैडेड ब्रा के ढकता हूँ....अब यहीं इनके साथ रहता हूँ....मुझे दुसरे शहर में ये काम करना पड़ता है....मेरे शहर से दूर....माँ की याद आने पर आज भी अँधेरे कोनों को अपनी सिसकियों का गवाह बना लेता हूँ...मैं अभिशप्त हूँ एक ज़बरदस्ती हिजडे का जीवन जीने को."..😥

समाज में हर जीवित चीज़ में स्त्रलिंग व पुलिंग जेन्डर होते हैं....पर इंसानों में एक तीसरा जेंडर भी होता है...जिसे आम भाषा में #किन्नर , #छक्का या #हिजड़ा कहते हैं...

क्या है किन्नर???? क्या कोई श्राप है??? कोई रहस्य है??? या कुछ बेहद डरावना है????

पहले तरह के #ट्रान्ससेक्सयुअलिटी (transsexuality) :
वे जिनका शरीर लड़कियों का सा होता है यानी स्तन होते हैं किंतु पुरुषवादी सोच और पुरुष लिंग होता है....ऐसो को transsexual....#यौन_संकर कहते हैं...ठीक ऐसा ही इसके विपरीत भी होता है यानी शरीर पुरुष का और सोच व हाव भाव स्त्री के.....इन दोनों परिस्थितियों में इलाज संभव है।

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्यूँ जरूरत पड़ती है ज़बरदस्ती किन्नर बनाने की.???

1 * समाज में इस तीसरे जेंडर को बाकी दो जेंडर सम्मान की नजर से नहीं देखते हैं।
2 * किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं है इनके लिए समाज में।(सिवाए बच्चे के होने...शादी ब्याह और गृह प्रवेश के समय ज़बरदस्ती लिए जाने वाले नेग के)
3 * समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए इन्हें कोई भी सरकारी या गैर सरकारी नौकरी में रखने के लिए तैयार नहीं होता।
4 * क्योंकि इनके परिवार में ना तो शादियां होती हैं और ना ही बच्चे ...इसलिए बुढ़ापे में इनका सहारा नए बनाए गए हुए किन्नर ही आय का स्रोत होते हैं।
5 * यह अगर हमारे घर आकर जोर जबरदस्ती करते हैं तो उस की सबसे बड़ी वजह हम स्वयं हैं ...हम इन्हें देखना नहीं चाहते ...हम इनसे बात नहीं करना चाहते ...और ना ही इन्हें हम किसी काम काज में अपने आसपास लगाना चाहते हैं...।

फिर कैसे हम समाज से इस हिस्से को बुराइयों से अलग कर पाएँगे???? हम जिनकी उपस्थिति हर शुभ कार्य में शुभ मानते हैं उनका जीवन खुद कितना अभिशप्त है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह समाज के सबसे तिरस्कृत समुदाय के रूप में जाना जाते हैं....

जब मां-बाप खुद अपने #ट्रांसजेंडर बच्चों को स्वीकार नहीं कर पाते हैं और थोड़ी ना नुकुर करने के बाद बच्चे को किन्नर समूह के हवाले कर देते हैं तो समाज उन्हें कैसे इतनी आसानी से स्वीकार करेगा??? ....
कठोर -लाउड , लड़ाई -झगड़ा करने वाले किन्नर नाम के मुखौटे के पीछे छुपे स्याह सच को देखने की कोशिश करी हैं समाज ने??? 
क्या ऐसे बच्चों को समान रूप से पढ़ने लिखने का अधिकार दिया गया है( हेय दृष्टि से देखें जाने और बात बात पर ताने कसे जाने पर बच्चे स्वयं ही स्कूल छोड़ देते हैं)....
जब मुसलमान और दलितों को समाज में समानता नहीं दे सके धर्म और समाज के ठेकेदार तो इस तीसरे लिंग(ट्रांसजेंडर) को इतनी आसानी से कैसे अपना पाएँगे??? 

ना चाहते हुए भी इस समुदाय को यह काम करना पड़ता है.... वरना सम्मान की रोटी और इज्जत के साथ सर उठा कर जीना हर कोई चाहता है....

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