आपकी कार या मोटर साइकिल के लिए सबसे सस्ता फर्स्ट पार्टी इन्शुरन्स। देखे।

कार इंश्योरेंस का महत्व तब सबसे ज्यादा महसूस होता है, जब कोई अपनी गाड़ी की चोरी की रिपोर्ट पुलिस स्टेशन में लिखवा रहा हो या एक्सिडेंट के बाद कार किसी वर्कशॉप में रिपेयर हो रही हो। दोनों ही स्थितियों में अगर उचित कवर हो तो पैसे का नुकसान नहीं होता। कोई स्टैंडर्ड कार इंश्योरेंस पॉलिसी आपके नुकसान की ठीक-ठाक भरपाई कर तो देगी, लेकिन आपकी जेब को फिर भी झटका लगेगा। इसी मोड़ पर ऐड-ऑन कवर की जरूरत पड़ती है। जनरल इंश्योरेंस कंपनियां कई कवर ऑफर करती हैं।

अपनी कैलकुलेशन के लिए हमने मारुति स्विफ्ट एलएक्सआई मॉडल का उदाहरण लिया और आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस की वेबसाइट से प्रीमियम के कोट्स लिए। दूसरी बीमा कंपनियों के प्रीमियम और बेनेफिट्स अलग हो सकते हैं।

रोड पर मदद
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फ्यूल खत्म हो जाए, टायर पंक्चर हो जाए या किसी भी वजह से गाड़ी रुक जाए तो बीमा कंपनी फ्यूल का इंतजाम करेगी, टायर ठीक कराएगी या पास की वर्कशॉप तक गाड़ी पहुंचाएगी। इंश्योरेंस पोर्टल ईजीपॉलिसीडॉटकॉम के सीईओ आलोक भटनागर ने कहा, 'अगर गलती से आपने चाबी कार के भीतर लॉक कर दी हो तो भी बीमा कंपनी किसी को भेजकर आपके घर से डुप्लिकेट चाबी मंगवाएगी।' इन सबकी लागत 60 पैसे प्रतिदिन से कम पड़ती है।

हमारा आकलन: सस्ता और उपयोगी। लेने लायक कवर, खासतौर से अगर महिला या बुजुर्ग को करनी हो ड्राइविंग।

जीरो डेप्रीसिएशन
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कोई भी स्टैंडर्ड कार इंश्योरेंस पॉलिसी किसी एक्सिडेंट में क्षतिग्रस्त कार के पुर्जों की डेप्रीसिएटेड वैल्यू ही रिम्बर्स करती है। अगर कार 10-12 लाख रुपये या इससे ज्यादा की हो तो नया पुर्जा काफी महंगा हो सकता है। प्लास्टिक का आम बंपर भी 12,000-15,000 रुपये का पड़ता है। हालांकि जीरो डेप्रीसिएशन ऐड-ऑन कवर पुर्जे की पूरी वैल्यू रिम्बर्स करता है। हालांकि आमतौर पर 5-6 साल से ज्यादा पुरानी कारों पर यह कवर नहीं मिलता है। रिलायंस जनरल इंश्योरेंस के सीईओ राकेश जैन ने कहा, 'अगर पिछले कुछ वर्षों में आपने कोई क्लेम नहीं लिया है तो जीरो डेप्रीसिएशन कवर की कोई तुक नहीं बनती।'

हमारा आकलन: महंगी कारों के मामले में उपयोगी कवर

इंजन की सुरक्षा
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किसी भी कार बीमा पॉलिसी में लापरवाही या टूटफूट से इंजन को हुआ नुकसान कवर में शामिल नहीं होता है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी कार जलजमाव वाले एरिया में खड़ी हो और आप इग्निशन चालू करें तो इंजन के डैमेज होने का पूरा खतरा रहता है। लापरवाह लोगों के लिए इंजन प्रोटेक्ट ऐड-ऑन कवर उपयोगी होता है। यह इंजन के ऐसे डैमेज को कवर करता है, जो एक्सिडेंट से न हुआ हो।

हमारा आकलन: सस्ता, लेकिन अगर आप लापरवाह न हों तो इसकी जरूरत नहीं।

कंज्यूमेबल्स कवर
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एक्सिडेंट के बाद इंजन ऑयल, ब्रेक फ्लुइड, कूलेंट और नट-बोल्ट्स जैसे कई कंज्यूमेबल्स पर काफी खर्च होता है। इंजन ऑयल की लागत हर फिलिंग पर करीब 2,500-4,000 रुपये आती है। कूलेंट की लागत 350-500 रुपये पड़ सकती है। स्टैंडर्ड कार इंश्योरेंस पॉलिसी ऐसे खर्च रिम्बर्स नहीं करती। हालांकि कुछ पैसा देकर आप इन आइटम्स पर खर्च का रिम्बर्समेंट पा सकते हैं। याद रखें कि यह कवर तभी उपयोगी है, जब इन कंज्यूमेबल्स का इस्तेमाल रिपेयरिंग में हुआ हो।

हमारा आकलन: विचार किया जा सकता है क्योंकि कंज्यूमेबल्स महंगे होते हैं।

डेली गैराज अलाउंस
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कार रिपेयरिंग के लिए गई हो तो आप कैसे काम चलाएंगे? जो लोग एक ही गाड़ी पर निर्भर हों और ऐसी जगहों पर रहते हों, जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट ठीक न हो, उनके लिए इस सवाल का जवाब मुश्किल हो सकता है। यह ऐड-ऑन कवर ऐसी मुश्किल आसान कर सकता है। अगर कार दो दिनों से ज्यादा समय वर्कशॉप में हो तो यह कवर 14 दिनों तक 500 रुपये का डेली अलाउंस देता है। यह बेनेफिट तभी मिलता है, जब कार किसी ऑथराइज्ड गैराज में रिपेयर की जा रही हो।

हमारा आकलन: बेनेफिट तो है, लेकिन महंगा है। ज्यादातर लोग न भी लें तो काम चलेगा।

पैसेंजर्स के लिए एक्सिडेंटल कवर
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यह मूलत: एक पर्सनल एक्सिडेंट कवर है और एक्सिडेंट में डेथ या डिसएबिलिटी होने पर यात्रियों को कंपनसेशन देता है। बीमा कंपनियां अलग-अलग मैक्सिमम कवर दे सकती हैं, लेकिन इसकी प्राइस आमतौर पर 125 रुपये प्रति 50,000 रुपये की होती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादातर लोगों के पास मेडिकल और लाइफ इंश्योरेंस होता ही है, लिहाजा इस कवर की कुछ खास जरूरत नहीं होती।

हमारा आकलन: बहुत काम का नहीं क्योंकि इंश्योरेंस कवर बहुत कम रहता है।

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