गौमांस खाने के आरोप में पुलिस ने मारा घर पर छापा। रोज़ेदारों पर किया हमला। पूरी खबर।


गाय और गोमांस के लिए विवाद थम नहीं रहा है। जनता खासकर एक समुदाय के लोगों के बीच ख़ौफ कायम है। दूसरी ओर इसे लेकर राज्य और पुलिस की गुंडागर्दी जारी है। अब नई कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में गुस्साई लोगों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया।
इस बवाल की वजह थी कि पुलिस गौकशी की गुप्त सूचना के आधार पर गांव में छापा मारने करने गई थी। जनता और पुलिस की झड़प में पुलिस को वहां अपने वाहन छोड़कर भागना पड़ा। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस दौरान पुलिस फायरिंग में कुल 8 लोग घायल हुए। जिनमें 5 पुलिस वाले हैं।

दोनों के बीच जमकर पथराव भी हुआ। गांववासियों का आरोप है की झूठी सूचना के आधार पर  पुलिस ने गांव के लोगों के साथ बदतमीज़ी की, पिटाई की और घरों में तोड़फोड़ की। पुलिस की इस कार्रवाई में कई बच्चे और युवा घायल हो गए। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस के आलाधिकारियों ने भारी पुलिस फोर्स के साथ गांव में डेरा डाल लिया।

जानकारी के अनुसार पुलिस गांव शेरपुर के इस्लाम और हसरत के घर पहुंची। घर में गोकशी किए जाने की बात कही। इस पर इस्लाम ने एतराज़ जताते हुए घर में बन रही आलू और गोभी की सब्ज़ी पुलिस के सामने कर दी। उन्होंने इफ्तार के वक्त पुलिस के घर में इस प्रकार आने पर भी एतराज़ जताया। उनका कहना है कि पुलिस ने कहा कि चुपचाप बताओ गोश्त कहां है।

इस दौरान पड़ोस के कुछ और लोग भी वहां आ गए। पुलिस ने आलू-गोभी की सब्ज़ी आंगन में फेंक दी और कहने लगी कि बताओ गोश्त कहां है। गोश्त ना मिलने पर पुलिस ने  चूल्हे पर पक रही सब्ज़ी को भिगौने का ढक्कन उठाकर देखना शुरू कर दिया, जिससे मामला बढ़ गया। इस पर गांववासी भड़क गए और पुलिस को दौड़ा दिया।

इस मामले पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुज़फ्फरनगर अनंतदेव तिवारी ने कहा कि उन्हें 100 नंबर पर सूचना मिली थी कि दो घरों में गोकशी हो रही है। लोगो ने विरोध में पुलिस की दो बाइक भी जला दी है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। तिवारी के अनुसार पुलिस जब जा रही थी तो गांव वालों ने पुलिस पर पथराव किया और आगजनी की।

गांववासियों ने ने बताया कि पुलिस ने फायरिंग की जिसमें 5 लोग घायल हो गए। इनमें 11-12 साल का एक बच्चा भी शामिल है। वहीं गांववासी  सहजाद ने कहा कि वह बीमार है।  पुलिस ने आते ही उसे लात मारी और थप्पड़ मारे। जबकि उसका रोज़ा था। सहजाद के अनुसार पुलिस वाले पूछ रहे थे कि गोश्त कहां है। इसपर उसने कहा कि उसे नहीं पता। वह बीमार है।
गांव की ही सायका ने कहा कि पुलिस ने घर में आते ही बर्तनों पर लातें चलाईं। कहा गोश्त पकाते हो। हमने कहा कि आप घर की तलाशी ले लो अगर आपको कहीं गोश्त मिल जाए तो गोश्त के साथ हमें भी ले ले जाना।  लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी।

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